Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full !!top!! -
यह चैत्यवंदन भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर (मुख्य शिष्य) पुंडरीक स्वामी को समर्पित है, जिन्हें शत्रुंजय पर्वत पर ही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
मुख्य जिनालय (Main Temple), गर्भगृह। हिंदी पाठ:
२. : यह चैत्यवंदन, जैन धर्म के एक अन्य प्रमुख आचार्य, श्री पद्मनाभनाथ जी को समर्पित है। यह चैत्यवंदन, अपनी विशाल मूर्ति और सुंदर नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
यहाँ पर का पूरा पाठ हिंदी में प्रस्तुत है। ये सभी जैन धर्म में प्रसिद्ध और नियमित रूप से बोले जाने वाले चैत्यवंदन हैं। palitana 5 chaityavandan in hindi full
पुंडरीक गणधर पद वंदूं, भविजन कुमुद विकास।ज्ञान विमल सुख संपति पाऊँ, मिटे कर्म का पाश।
(इसके बाद १ लोगस्स का काउस्सग्ग और नमोत्थुणं बोलें)
5. भगवान आदिनाथ का चैत्यवंदन (पाँचवा वंदन) जिसकी आयु विशाल।" Tattva Gyan
यह स्थान इतना पवित्र है कि इसके दर्शन मात्र से दुर्गति (नरक या नीच गति) का नाश हो जाता है। जो यात्री पूरे श्रद्धा और भाव के साथ इस गिरिराज पर चढ़ते हैं, वे संसार रूपी सागर (भवपार) से पार हो जाते हैं।
मुख्य मंदिर के प्रांगण में प्रथम गणधर पुंडरीक स्वामी का मंदिर है। भाव:
जब भाविक जैन श्रद्धालु पालिताना की पावन यात्रा (विशेषकर 99 यात्रा या छः री यात्रा) करते हैं, तो मुख्य रूप से करने का विधान है। इस लेख में पालिताना के इन सभी 5 चैत्यवंदनों का संपूर्ण पाठ (Full Text) हिंदी और देवनागरी लिपि में अर्थ सहित प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि आप अपनी यात्रा के दौरान इसका शुद्ध उच्चारण कर सकें। palitana 5 chaityavandan in hindi full
इस पर्वत पर विराजमान आदिदेव भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा और रायण वृक्ष के नीचे स्थापित उनकी चरण पादुकाओं की पूजा करके मेरा मन आनंदित हो उठता है। इस गिरिराज की महिमा अनंत है, जिसका पूरा बखान कोई नहीं कर सकता। चैत्र सुद पूर्णिमा (चैत्री पूनम) के दिन यहाँ की महिमा और भी अधिक बढ़ जाती है। मन में सच्ची भक्ति लाकर इस सुखदायक शत्रुंजय तीर्थ की सदा सेवा करनी चाहिए।
मैं १६वें तीर्थंकर माता अचिरा के पुत्र भगवान शांतिनाथ की वंदना करता हूँ जो भव्य जीवों को सुख देने वाले हैं। आपका लांछन (चिन्ह) हिरण (मृग) है और आपकी आयु एक लाख वर्ष की थी। हस्तिनापुर नगरी के स्वामी प्रभु शांतिनाथ गुणों की खान हैं। आपकी ४० धनुष ऊँची सुवर्ण जैसी देह और चंद्रमा के समान मुखमंडल का दर्शन करने से परम कल्याण होता है।
चोरासी लाख पूर्व की, जिसकी आयु विशाल।" Tattva Gyan